Vaishnavas are extremely dear to Lord Sri Krishna

Srila-Bhakti-Bibudha-Bodhayan-Goswami-Maharaj-Quote-25-September
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Supreme Lord Sri Krishna Chaitanya Mahaprabhu advocated humility, tolerance, compassion and constant chanting of the Hare Krishna Mahamantra. This is the essence of our Vaishnava culture. While practicing devotional service if one has even a tinge of desire for name, fame, recognition and material wealth then he must understand that he is chanting the Mahamantra with offences. To experience unceasing spiritual bliss while chanting the Hare Krishna Mahamantra we have to meditate on Supreme Lord’s divine name, beautiful form, wonderful qualities, sweet pastimes and His holy abode, Goloka Vrindavan.

Srila Bhakti Bibudha Bodhayan Goswami Maharaj
25-September-2020

Srila-Bhakti-Bibudha-Bodhayan-Goswami-Maharaj-Quote-25-September-Hindi
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भगवान् श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु ने विनम्रता, सहिष्णुता, करुणा और निरंतर हरे कृष्ण महामंत्र का जप करने की शिक्षा दी है| यही हमारी वैष्णव संस्कृति का सार है| हमें यह समझना चाहिए कि भक्ति का अभ्यास करते समय यदि हमें अल्प मात्र भी नाम, प्रसिद्धि, मान्यता और भौतिक धन प्राप्त करने की इच्छा है तो हम अपराधों के साथ महामंत्र का जप कर रहे हैं| यदि हम हरे कृष्ण महामंत्र का जप करते समय स्थायी रूप से अध्यात्मिक आनंद का अनुभव करना चाहते हैं तो हमें भगवान् के दिव्य नाम, रूप, उनके अद्भुत गुण, उनकी मधुर लीलाओं और उनके पवित्र धाम, गोलोक वृन्दावन का ध्यान करना चाहिए|

श्रील भक्ति विबुध बोधायन गोस्वामी महाराज
25-September-2020


Srila-Bhakti-Bibudha-Bodhayan-Goswami-Maharaj-Quote-24-September-2020
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We endeavour to attain our material objective desiring some peace and happiness which is temporary in nature. As specified by Supreme Lord Sri Krishna Chaitanya Mahaprabhu we can accomplish the highest perfection of this human life through the chanting of the Hare Krishna Mahamantra under the shelter of pure devotees and receive the loving devotional service of the Divine Couple Sri Sri Radha-Govinda in their eternal blissful abode, Goloka Vrindavan.

Srila Bhakti Bibudha Bodhayan Goswami Maharaj
24-September-2020

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शांति और आनंद की प्राप्ति की इच्छा से हम अपने भौतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करते रहते हैं परन्तु सच तो यह है कि यह सभी वस्तुएं अस्थायी हैं| भगवान् श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु ने बताया है कि शुद्ध भक्तों का आश्रय लेकर जब हम हरे कृष्ण महामंत्र का जप करेंगे तब हम अपने मनुष्य जीवन की सर्वोच्य स्तिथि को प्राप्त कर लेंगे और दिव्य युगल जोड़ी श्री श्री राधा गोविन्द की प्रेममयी सेवा को, उनके नित्य आनन्दमय धाम में, प्राप्त कर सकेंगे|

श्रील भक्ति विबुध बोधायन गोस्वामी महाराज
24-September-2020

Srila-Bhakti-Bibudha-Bodhayan-Goswami-Maharaj-Quote-23-September-2020
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During difficult times we get to see the real mood of the people surrounding us and soon we realise that Supreme Lord Sri Krishna is our only refuge, He is our Supreme father and our only well-wisher who has an eternal natural affection for us.
The most merciful Supreme Lord Sri Krishna takes the form of Lord Nrsimhadeva and eliminates all our obstacles to practice devotional service and save us from our distressed condition. In this Iron age, the best devotional service is chanting the Hare Krishna Mahamantra under the shelter of the Guru Parampara and reawaken the ecstatic love for Sri Sri Radha-Krishna in our heart.

Srila Bhakti Bibudha Bodhayan Goswami Maharaj
23-September-2020

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मुश्किल समय के दौरान हमें अपने आस-पास के लोगों की वास्तविकता पता चलती है और जल्द ही हमें यह एहसास हो जाता है कि भगवान् श्री कृष्ण ही हमारे एकमात्र आश्रय हैं, वे ही हमारे परम पिता हैं और वे ही हमारे एकमात्र शुभचिंतक हैं जिन्हें हमारे प्रति नित्य स्वाभाविक प्रेम है| परम कृपालु भगवान् श्री कृष्ण, भगवान नृसिंहदेव का रूप धारण करके हमारे भक्ति मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को दूर कर देते हैं और कठिन परिस्थितियों से हमारी रक्षा करते हैं| गुरु परंपरा का आश्रय लेकर हरे कृष्ण महामंत्र का जप ही इस कलियुग में सर्वश्रेष्ठ भक्ति का मार्ग है जो कि हमारे ह्रदय में श्री श्री राधा कृष्ण के प्रति हमारे उन्मत्त प्रेम को पुनः जागृत कर देता है|

श्रील भक्ति विबुध बोधायन गोस्वामी महाराज
23-September-2020

Srila-Bhakti-Bibudha-Bodhayan-Goswami-Maharaj-Quote-22-September-2020
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Inner peace is a rare phenomenon nowadays when people have cultivated a fault-finding tendency, which makes them change their friends, partners, home, job and so on, but they see no end to their concerns. One can easily come out of this turmoil of mind and become pacified through spiritual realisation, which comes through the chanting of the Divine Hare Krishna Mahamantra. A devotee is always peaceful as he is free from the propensity to criticise others and they see faults in themselves and thus rectify them.

Srila Bhakti Bibudha Bodhayan Goswami Maharaj
22-September-2020

Srila-Bhakti-Bibudha-Bodhayan-Goswami-Maharaj-Quote-22-September-2020-Hindi
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आतंरिक शांति पाना आजकल के समय में बहुत दुर्लभ है क्यूंकि लोगों में एक दूसरे के दोष खोजने की प्रवृत्ति हो गयी है जिसके फलस्वरूप वह अपने मित्र, अपनी नौकरी, अपना घर और यहाँ तक की अपने जीवन साथी का परिवर्तन करते रहते हैं और यह सब करने के उपरांत भी उनकी चिंताओं का कोई अंत नहीं होता है| दिव्य हरे कृष्ण महामंत्र के जप द्वारा हम मन की इस उथल पुथल से आसानी से बाहर आ सकते हैं और इस तरह आत्म साक्षात्कार के माध्यम से शान्ति प्राप्त कर सकते हैं| एक भक्त सदैव ही शांत रहता है क्यूंकि वह दूसरों की आलोचना करने से मुक्त होता है बल्कि वह तो स्वयं में दोष देखकर उसे सुधारने का प्रयास करता है|

श्रील भक्ति विबुध बोधायन गोस्वामी महाराज
22-September-2020

Srila-Bhakti-Bibudha-Bodhayan-Goswami-Maharaj-Quote-21-September-2020
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One cannot attain Sri Krishna’s lotus feet even after taking millions of birth as humans and chanting the Hare Krishna Mahamantra unless he fully gives up criticism and blasphemy of Vaishnavas. Supreme Lord Sri Krishna is non-different from the Hare Krishna Mahamantra and the Vaishnavas are extremely dear to Him. One can never get the mercy of the Holy Mahamantra if he criticises devotees as criticism pollutes the heart and it will destroy ones spiritual life. We can purify our heart by glorifying Vaishnavas and chanting the Hare Krishna Mahamantra without offences. This practice will definitely get us the loving devotional service of Sri Sri Radha Krishna in Goloka Vrindavan.

Srila Bhakti Bibudha Bodhayan Goswami Maharaj
21-September-2020

Srila-Bhakti-Bibudha-Bodhayan-Goswami-Maharaj-Quote-21-September-2020-Hindi
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मनुष्य के रूप में लाखों जन्म लेने और हरे कृष्ण महामंत्र का जप करने के बाद भी हमें श्रीकृष्ण के चरण कमलों की प्राप्ति नहीं हो सकती, जब तक कि हम वैष्णवों की आलोचना और निन्दा करना पूरी तरह से त्याग नहीं देते| भगवान् श्रीकृष्ण हरे कृष्ण महामंत्र से अभिन्न हैं और वैष्णव उन्हें अत्यंत प्रिय हैं| अगर कोई वैष्णवों की निंदा करता है तो उसका ह्रदय दूषित हो जाता है और उसे पवित्र महामंत्र की कृपा कभी प्राप्त नहीं होती है जिसके फलस्वरूप उसका अध्यात्मिक जीवन नष्ट हो जाता है| अगर हम वैष्णवों की स्तुति करते हुए अपराधमुक्त होकर हरे कृष्ण महामंत्र का जप करेंगे तो हमारा ह्रदय शुद्ध हो जायेगा| इस तरह का अभ्यास करने से हमें निश्चित ही गोलोक वृन्दावन में श्री श्री राधा कृष्ण की प्रेममयी सेवा प्राप्त होगी|

श्रील भक्ति विबुध बोधायन गोस्वामी महाराज
21-September-2020

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